मौसमी फलों के पेय पदार्थ
नींबू, बेल, बेर, आम, तरबूज़ और संतरे से स्क्वैश, कॉर्डियल और शरबत बनाना सीखें, साथ ही उनकी पैकिंग और बिक्री का तरीका भी।
पंजीकृत संस्था · सागर (म.प्र.) · 2007 से
अंजलि समाज कल्याण एवं विकास समिति मध्य प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को फल परिरक्षण, खाद्य प्रसंस्करण और जड़ी-बूटी उत्पादों का प्रशिक्षण देती है, ताकि वे सम्मान के साथ कमा सकें और अपना छोटा उद्यम शुरू कर सकें।
हमारा परिचय
2007 में सागर में स्थापित और फल परिरक्षण विशेषज्ञ श्रीमती सुनीता मिश्रा के नेतृत्व में, समिति अपने पूर्णतः सुसज्जित खाद्य प्रसंस्करण कार्यालय से व्यावहारिक प्रशिक्षण देती है।
अंजलि समाज कल्याण एवं विकास समिति का लक्ष्य ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को कौशल प्राप्त करने तथा सार्थक और सम्मानजनक रोज़गार पाने में सहयोग देना है। हम उद्यमिता को भी बढ़ावा देते हैं और प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण के लघु एवं सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने में मदद करते हैं।
हमारा ध्येय कौशल विकास प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं की क्षमता का निर्माण करना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम
एक और तीन दिन के कार्यक्रम, जिनमें प्रायोगिक सत्र, प्रमाण-पत्र और पैकिंग व विपणन का मार्गदर्शन शामिल है।
नींबू, बेल, बेर, आम, तरबूज़ और संतरे से स्क्वैश, कॉर्डियल और शरबत बनाना सीखें, साथ ही उनकी पैकिंग और बिक्री का तरीका भी।
मौसम में बचे टमाटरों से सॉस, केचप, सूप, चटनी, कॉकटेल और पाउडर बनाना सीखें, साथ ही बोतलों को जीवाणुरहित करने, पैकिंग और विपणन की जानकारी।
फल परिरक्षण का एक दिवसीय परिचय: आंवला कैंडी, आंवला लड्डू, नींबू स्क्वैश और कॉर्डियल, और बेल शरबत।
आंवला, अश्वगंधा, बेल, सफ़ेद मूसली, ब्राह्मी, अर्जुन, तुलसी और शतावरी से चूर्ण बनाना सीखें: ये सभी पौधे सागर के आसपास उगते हैं।
प्रमुख कार्यक्षेत्र
मध्य प्रदेश की महिलाओं और युवाओं को स्थानीय फलों और जड़ी-बूटियों से ऐसे उत्पाद बनाना सिखाना, जिन्हें वे स्वयं बनाकर बेच सकें।
फल परिरक्षण, पेय पदार्थ, टमाटर उत्पाद और जड़ी-बूटी चूर्ण का व्यावहारिक प्रशिक्षण, साथ में इकाई शुरू करने के लिए परियोजना प्रतिवेदन का मार्गदर्शन।
वृक्षारोपण अभियान और पर्यावरण जागरूकता, जिसमें डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के परिसर में वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण का कार्य शामिल है।
नेतृत्व
अध्यक्ष
फल परिरक्षण विशेषज्ञ
श्रीमती सुनीता मिश्रा समिति और उसके प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नेतृत्व करती हैं। राज्य स्तर पर पुरस्कृत फल परिरक्षण विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने 150 से अधिक महिलाओं को फल परिरक्षण और फलों के पेय बनाने का प्रशिक्षण दिया है, और आकाशवाणी तथा राष्ट्रीय कृषि साप्ताहिकों के माध्यम से व्यंजन और परिरक्षण की विधियां साझा की हैं।
सलाहकार
पूर्व वरिष्ठ उद्यान अधिकारी, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, म.प्र. शासन
श्री राजेश कुमार मिश्रा को मध्य प्रदेश शासन में उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में 38 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण पर पुस्तकों का संपादन किया है, लगभग 50 रेडियो वार्ताएं दी हैं, और पर्यावरण जागरूकता के कार्य के लिए राज्य शासन द्वारा सम्मानित किए गए हैं।
हमारी यात्रा
2004
श्रीमती सुनीता मिश्रा ने राज्य आम प्रदर्शनी, सागर में आम स्क्वैश के लिए प्रथम पुरस्कार जीता।
2005
श्री आर.के. मिश्रा द्वारा संपादित खाद्य प्रसंस्करण की पुस्तकों का विमोचन राज्य स्तरीय कृषि मेला, गढ़ाकोटा में हुआ। स्व-सहायता समूहों के बनाए उत्पाद भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला, नई दिल्ली में प्रदर्शित किए गए।
2007
अंजलि समाज कल्याण एवं विकास समिति का पंजीकरण 26 अप्रैल 2007 को हुआ (पंजीयन क्र. 06/09/01/05923/07)।
2008
युवा कृति, चेन्नई में समिति की आंवला बर्फ़ी और आंवला लड्डू की तमिलनाडु के युवा कल्याण मंत्री ने सराहना की।
2009–10
श्री आर.के. मिश्रा डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की परिसर सौंदर्यीकरण समिति में शामिल हुए; बाद में विश्वविद्यालय ने समिति के कार्य को सम्मानित किया।
2020
समिति ने 9 मार्च 2020 को आयोजित किसान मेला एवं महिला समूह सम्मेलन में भाग लिया।
2020–21
लॉकडाउन के दौरान सचिव अंजलि जी ने राजमार्ग पर पैदल घर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों को भोजन के पैकेट बांटे।
सामान्य प्रश्न
यह सागर, मध्य प्रदेश की एक पंजीकृत स्वयंसेवी संस्था (NGO) है, जिसकी स्थापना 2007 में हुई। यह ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को फल परिरक्षण, खाद्य प्रसंस्करण और जड़ी-बूटी उत्पादों का प्रशिक्षण देती है, ताकि वे सम्मानजनक काम पा सकें या छोटा उद्यम शुरू कर सकें।
हां। समिति का पंजीकरण 26 अप्रैल 2007 को पंजीयन क्रमांक 06/09/01/05923/07 के अंतर्गत हुआ है।
समिति की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता मिश्रा हैं, जो राज्य स्तर पर पुरस्कृत फल परिरक्षण विशेषज्ञ हैं। सलाहकार श्री राजेश कुमार मिश्रा हैं, जो मध्य प्रदेश शासन के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से सेवानिवृत्त वरिष्ठ उद्यान अधिकारी हैं और जिन्हें 38 वर्षों का अनुभव है।
चार व्यावहारिक कार्यक्रम: मौसमी फलों के पेय पदार्थ (3 दिन), टमाटर के मूल्य संवर्धित उत्पाद (3 दिन), फल परिरक्षण यानी आंवला उत्पाद (1 दिन), और औषधीय एवं जड़ी-बूटी उत्पाद (1 दिन)। हर कार्यक्रम में प्रायोगिक सत्र और पैकिंग व विपणन का मार्गदर्शन शामिल है।
ये कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, बीपीएल परिवारों की महिलाओं और खाद्य प्रसंस्करण से कमाई करना चाहने वाले युवाओं के लिए बनाए गए हैं। पहले से किसी अनुभव की ज़रूरत नहीं है।